एक बार एक कौए को कहीं से रोटी का एक टुकड़ा मिला। वह बहुत खुश हुआ और उसे लेकर एक पेड़ की डाली पर बैठ गया ताकि आराम से खा सके। उसी समय, एक चालाक लोमड़ी वहाँ से गुज़र रही थी। उसने कौए की चोंच में रोटी का टुकड़ा देखा और उसके मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा, “यह रोटी मुझे मिलनी चाहिए।”

लोमड़ी ने एक योजना बनाई। वह पेड़ के नीचे गई और कौए से बोली, “नमस्ते, कौए भाई! आप तो बहुत सुंदर हैं। आपका रंग कितना काला और चमकदार है! मैंने सुना है कि आपकी आवाज़ भी बहुत मधुर है। क्या आप मेरे लिए एक गाना गाएँगे?”

अपनी झूठी तारीफ़ सुनकर कौआ बहुत खुश हो गया। वह भूल गया कि वह अपनी चोंच में रोटी दबाए हुए है। जैसे ही उसने गाना गाने के लिए मुँह खोला, रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया। लोमड़ी ने झट से रोटी उठाई और उसे खाकर बोली, “कौए भाई, इस दुनिया में झूठी तारीफ़ करने वालों से सावधान रहना चाहिए।”

यह कहकर लोमड़ी वहाँ से चली गई और कौआ अपनी मूर्खता पर पछताता रह गया।


सीख: झूठी तारीफ़ करने वालों पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए।

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