एक लोमड़ी बहुत भूखी थी। वह भोजन की तलाश में एक बाग़ में पहुँची। उसने वहाँ बेल पर लगे पके हुए अंगूरों का गुच्छा देखा। अंगूरों को देखकर उसके मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा, “ये अंगूर तो बहुत मीठे होंगे।” वह अंगूरों को पाने के लिए उछली, लेकिन अंगूर बहुत ऊँचे थे और उसकी पहुँच से बाहर थे।
उसने कई बार कोशिश की, लेकिन हर बार असफल रही। जब वह थक गई और उसे यकीन हो गया कि वह अंगूर नहीं पा सकती, तो वह निराश होकर वहाँ से चली गई। जाते-जाते वह बुदबुदाई, “ये अंगूर तो खट्टे हैं। मुझे वैसे भी इन्हें नहीं खाना था।”
सीख: जो चीज़ हमें नहीं मिलती, हम अक्सर उसमें कमी निकालने लगते हैं।